रात तुम्हारी यादों ने दिल को इस तरह छेड़ा
तकिया भीगता रहा और यादें सिसकती रही।
महीनें वर्ष बीत गए पर यादें भुलाई नहीं गई
नज़रों से दूर हो कर भी साँसों में बसी रही।
कल रात उदासियों ने आकर मुझे घेर लिया
तारों की छाँह में तुम्हारी यादें मचलती रही। तुम्हारे बिछुड़ते ही चहरे की रौनक बदल गई
बदलाव में आँखें अश्रु टकसाल बन बहती रही।
रात भर जिस्म जलता रहा तुम्हारा जिस्म छूने
तन्हाई में बाहों की तलाश रात भर जारी रही।
मन को समझाता रहा आँखें छलकती रही।
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