रविवार, 18 नवंबर 2018

अक्सर मैं जब तनहा होता

अक्सर मैं जब तनहा होता, गीत तुम्हारे लिखता हूँ
बैठ कल्पना के पंखों पर, मैं तुमसे मिलता रहता हूँ।

भूल हुई मुझसे जीतनी भी, मैं स्वीकार उन्हें करता हूँ
तुम छोड़ गई मझधार मुझे, यह स्वीकार नहीं करता हूँ। 

तुम तो भूल गई मुझको, मैं तो याद सदा करता हूँ
एक बार देखो ऊपर से, कब से तुम्हें निहार रहा हूँ।

नींद नहीं आती है मुझको, यादों के संग सोता हूँ 
  सपनों की गोदी में चढ़ कर, तुम को गले लगाता हूँ।  

हर पल तुम्हारी यादों को, मैं दिल में बसाए रखता हूँ
जब-जब याद तुम्हारी आती, मैं गुनगुनाया करता हूँ।

                                          आँखों से अश्रुजल बहता, जब भी तुम पर लिखता हूँ 
                                           कैसे लिख दूँ मन की बातें, जो मैं लिखना चाहता हूँ। 

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