सूर्य का प्रकाश
कमरे से लौट रहा है
शाम का धुंधलका
अपने पंख फैला रहा है
मैं अकेला कमरे में
लौट आया हूँ
तुम्हारे संग बिताए
लम्हों को ढूंढ रहा हूँ
तुम्हें याद करते ही
आँखों से अश्रु छलक आते हैं
तुम्हारी एक झलक पाने को
मेरे नयन तरस जाते हैं
तुम्हारी यादों की नदी
मेरे अन्दर बहुत गहरी बहती है
मधुर स्मृतियों की लहरें
मेरे विरह के घावों को
सहलाती रहती है
मैं तुम्हारी यादों के छोरों को
अपने संग जोड़ता रहता हूँ
रात के सन्नाटे में
टुकड़े-टुकड़े सोता हूँ
मेरी जिंदगी की सारी खुशियाँ
तुम्हारे संग चली गई है
तुम्हारी मृत्यु के साथ
थोड़ी मृत्यु मुझे भी आई है।
कमरे से लौट रहा है
शाम का धुंधलका
अपने पंख फैला रहा है
मैं अकेला कमरे में
लौट आया हूँ
तुम्हारे संग बिताए
लम्हों को ढूंढ रहा हूँ
तुम्हें याद करते ही
आँखों से अश्रु छलक आते हैं
तुम्हारी एक झलक पाने को
मेरे नयन तरस जाते हैं
तुम्हारी यादों की नदी
मेरे अन्दर बहुत गहरी बहती है
मधुर स्मृतियों की लहरें
मेरे विरह के घावों को
सहलाती रहती है
मैं तुम्हारी यादों के छोरों को
अपने संग जोड़ता रहता हूँ
रात के सन्नाटे में
टुकड़े-टुकड़े सोता हूँ
मेरी जिंदगी की सारी खुशियाँ
तुम्हारे संग चली गई है
तुम्हारी मृत्यु के साथ
थोड़ी मृत्यु मुझे भी आई है।
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